विधा-गीतिका
पदान्त-निकले
समान्त- आने

ऋतुपति पुष्प खिलाने निकले,
भ्रमरों को बहकाने निकले।

आम्र बौर पर पिक रसवंती
उसको गीत सिखाने निकले।

सुभग शिखावल के पंखों में
दहके रंग लगाने निकले।

अन्यमनस्का सी विरहन को
मादक दाख पिलाने निकले।

ललित लवंग लता गुल्मो में
किसको आज छुपाने निकले।

पवमानों में मकरंदों को
इत उत आज उड़ाने निकले।

प्रेम परीक्षा में यामा के,
जुगनू ही दीवाने निकले।

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