किंचित मृदु भावों से भरकर देखो पुलकित मन खिलते हैं।

मधुर मिलन की आस सँजोए मिलने को आतुर दिखते हैं।

अरमानों की सेज सजाए दो प्रेमी अंतस अकुलाए –

बीच क्षितिज आभास कराता रवि-वसुधा दोनों मिलते हैं।

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