जाने कितने अध्याय नये ,
मिलकर के हमने साथ पढ़े ।

यश मान प्रतिष्ठा वैभव भी ,
तुमसे जीवन में सकल बढ़े ।।

है कृपा ईश की मुझ पर यह ,
जीवन में तुमको पाना भी ।

जीवन के नूतन शिलालेख ,
तुमने अगणित हैं मीत गढ़े।।

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