भारतीय कंपनी की एक शाखा मे शेखर की नौकरी लगे अभी कुछ ही दिन हुए होंगे। शेखर की ईमानदारी को देखते हुए, कंपनी के द्वारा बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। शेखर दिन रात एक करके कंपनी के कारोबार को ऊपर उठाने का लिए प्रयत्न करने लगा। इस प्रयास में उसका साथ दे रही निकिता भी बहुत मेहनत करती।  आज वह  दिन आ गया जब देश के प्रमुख कारोबारीयों के साथ वार्तालाप का अवसर शेखर को प्राप्त हुआ। कंपनी के प्रमुख ने आज अपने सलाहकार के माध्यम से शेखर पर नज़र रखी हुई थी। मेज पर दस्तावेज रखकर शेखर ने अपनी योजना समस्त व्यापारियों को बताई। जिससे सभी व्यापारी  प्रसन्न हुए और व्यापार की सहमति दी।
किन्तु  व्यापारियों को प्राप्त दस्तावेजों में योजना के विपरीत, नियम और शर्तों को देख व्यापारियों  ने , विरोधाभास के कारण अपनी सहमति वापस ले ली। निकिता मन ही मन प्रसन्न हो रही थी। किन्तु कंपनी के प्रमुख ने व्यापारियों के समक्ष निकिता को नौकरी से निकालने का फैसला सुनाया। शेखर के बारंबार निवेदन  से निकिता की बहाली हुई। कंपनी आज ऊंचाइयों को छूने लगा।शेखर आज निदेशक के पद पर तथा निकिता सलाहकार के पद पर पदासीन है।

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